सोशल मीडिया और परिवार के मध्य बढ़ती दूरिया

जैसा कि हम जानते हैं आज सोशल मीडिया से बच्चा बच्चा परिचित है | आज के समय में ऐसा कोई भी नहीं है जो सोशल मीडिया के बारे में ना जानता हो फिर वे चाहे बच्चा हूं या बूढ़ा |

social medai or parivar

जैसा कि हम जानते हैं आज सोशल मीडिया से बच्चा बच्चा परिचित है | आज के समय में ऐसा कोई भी नहीं है जो सोशल मीडिया के बारे में ना जानता हो फिर वे चाहे बच्चा हूं या बूढ़ा | सभी सोशल मीडिया से भली प्रकार परिचित है | पहले नई उम्र के लोग इससे जुड़े हुए थे फिर धीरे-धीरे अधिक उम्र के लोग भी से जुड़ते गए |

पिछले एक दशक में सोशल नेटवर्किंग साइटों की लोकप्रियता बहुत ही तेजी से बड़ी है और यह इतनी ज्यादा तेजी से बढ़ी है कि लोग अपने जीवन के हर पहलू में सोशल वीडियो का उपयोग करते है और इस पर एक्टिव रहना पसंद करते हैं सोशल मीडिया ने एक तरह से लोगों के जीवन पर अपना कब्जा सा बना लिया है |

आज लोग अपने जीवन के हर पहलू में दूसरे लोगों की राय उनकी पसंद उनकी रुचि जाना चाहते है आज सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म जैसे व्हाट्सएप फेसबुक ट
ट्विटर, इंस्टाग्राम आदि के जरिए लोग आपस में जुड़े हुए हैं लेकिन क्या कभी आपने ऐसा महसूस किया लोगों के इस आपसी जुड़ाव मै अपनेपन व उनकी रुचि से ज्यादा प्रतिस्पर्धा ईर्ष्या और जलन की भावना विद्यमान है??

सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता ने लोगों को अपने जीवन में इतना ज्यादा व्यस्त कर दिया है कि उन्हें अपनों से बात करने तक का वक्त नहीं है | जहां पहले परिवार के लोग एक साथ बैठकर खाते व बातचीत करते थे हमें यह दृश्य अब बहुत ही कम देखने को मिलता है | क्योंकि कहीं ना कहीं इसकी जगह सोशल मीडिया ने ले ली है| सोशल मीडिया ने लोगों को एकांत कर दिया है |

सोशल मीडिया ने परिवारों के समीकरण को एक बहुत ही बड़े पैमाने पर बदल कर रख दिया है | आज घर में एक ही छत के नीचे बैठे लोग आपस में बात करने हेतु संदेशों का प्रयोग करते हैं | उन्हें अपने कमरे से निकलकर बाहर जाने तक का वक्त नहीं है | आप समझ सकते हैं कि सोशल मीडिया आज के लोगों पर किस प्रकार हावी हो चुका हैं |

जहां पहले लोग अपने खाली समय को अपने परिवार के साथ बिताया करते थे उस खाली समय मैं आज लोग परिवार के साथ रहने की बजाए सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना अधिक पसंद करते हैं | सोशल मीडिया लोगों को अपनों से दूर गैरों को पास लाने का काम करना है

लोग आज अपने लोगों की राय लेने से ज्यादा बाहरी लोगों की राय लेने को प्राथमिकता देते हैं सोशल मीडिया ने इस कदर लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है कि सोशल मीडिया के अलावा उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता उन्हें अपने परिवार से ज्यादा बाहरी लोगों पर भरोसा होने लगा है

इस प्रकार के व्यवहार ने परिवार के लोगों के बीच की दूरियों को कई गुना बढ़ा दिया है इन दूरियों ने उन्हें अकेलेपन से भर दिया है | एक ही घर में रहकर ऐसे प्रतीत होते हैं जैसे मानो आपस में किसी को जानते हैं ना हो | आज परिवार में होने वाली बातों का हमें केवल अंदाजा है पूरी बात का पता नहीं होता और इसे जानने का ना तो हमारे पास वक्त है और ना ही कोई इच्छा |

सोशल मीडिया हर उम्र के लोगों की जरूरत बन चुका है उससे जुड़े रहना उनकी एक आदत सी बन चुकी है सोशल मीडिया ने परिवारों को एक तरह से बिखेर कर रख दिया है | परिवार के सभी लोग इसके कारण अलग होते जा रहे है | उनमे आपसी प्रेम खत्म होता जा रहा है |

यह भी सच है की सोशल मीडिया के जरिये हम बहुत अधिक लोगों से जुड़े हुए है परन्तु कही न कही इस जुड़ाव में अधूरापन है | सोशल मीडिया के कारण परिवारों के मध्य दूरिया आये दिन बढ़ती ही जा रही है | अब देखना यह है की यह सोशल मीडिया की दिखवती दुनिया परिवारों का स्वरुप किस हद तक बदलेगी |

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