बच्चों पर विज्ञापन का प्रभाव

आज के इस लेख में हम विज्ञापन का बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ता है इसके बारे में चर्चा करेंगे आइए देखते हैं और जानते हैं यह प्रभाव क्या है और यह किस प्रकार बच्चों को प्रभावित करते हैं

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vigyapan ka prabhav bacho par

बच्चों को किस तरह प्रभावित करता है विज्ञापन :-

जैसा कि हम जानते हैं आज युग में उत्पादन के विज्ञापन पर काफी जोर दिया जा रहा है | किसी भी उत्पाद को बनाने से अधिक उसे बेचने में कठिनाई आती हैं |

इसे बेचने हेतु कई तरह से लोगों के दिमाग से खेलना पड़ता है|पैसा पानी की तरह बहाना पड़ता है |हम इस बात को भी बिल्कुल नकार नहीं सकते कि आज के दौर में विज्ञापन का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों और युवा पर पड़ता है|

आपने यह सुना होगा कि जो दिखता है वही बिकता है, और यह बात बिल्कुल सही है|यह विज्ञापन भी ठीक इसी दिशा में कार्य करता है |क्योंकि हम देखते हैं कि जिस उत्पाद का विज्ञापन जितना अधिक दिखता है व उतना ही अधिक बिकता है क्योंकि इससे लोगों के दिमाग में उस उत्पाद के प्रति आकर्षण पैदा होता है |

आज के बच्चों पर विज्ञापन का प्रभाव अधिक देखने को मिलता है| बच्चों पर टॉफी से लेकर कार तक का विज्ञापन उन्हें आकर्षित करता है |फिर वह विज्ञापन भले ही उनके मतलब का हो या ना हो |

आज के बच्चे हो या युवा दोनों ही फोन और टीवी के काफी ज्यादा दीवाने हैं |आपने देखा होगा यदि कोई बच्चा रो रहा है तो उसे चुप कराने हेतु उसके हाथ में टीवी का रिमोट या मोबाइल फोन पकड़ा दो वह चुप हो जाएगा |भले ही उस बच्चे को कुछ भी ना आता हो परंतु वह मोबाइल फोन भली प्रकार चलाना जानता है|

बच्चों में ऐसी आदत किशोरावस्था तक पहुंचते-पहुंचते उनकी लत बन जाती है |परिणामस्वरूप आगे चलकर कई बच्चों की हर समस्या का समाधान ही फोन और टीवी बन जाता है |

बच्चे फोन या टीवी पर कोई कार्यक्रम देखें कार्टून दोनों पर ही वह विज्ञापनों को देखते हैं जोकि उनके मन मस्तिष्क को फोकस कर ही बनाए जाते है|

टीवी पर कार्टून व चलचित्र पात्र दोनों ही बच्चों को प्रभावित करते हैं व अपनी और आकर्षित करते हैं |जैसे जैसे बच्चे बड़े होते हैं मैं इन पात्रों के प्रति भावनात्मक रूप से जुड़ने लगते हैं|

तथा उनके द्वारा विज्ञापित उत्पादक की ओर आकर्षित होते है |आप यह जानकर हैरान होंगे की पेय और खाद्य कंपनियां विज्ञापन पर लगभग 1200 करोड़ रुपए का खर्च करते इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि विज्ञापन का क्षेत्र कितना विस्तृत है |

इसके अलावा बच्चों को जो प्रभावित करता है वह उत्पाद की कंपनियों के द्वारा दिए जाने वाला ऑफर जैसे कि बच्चों के खाए जाने वाली चीजों जैसे कैंडी चिप्स कुरकुरे इनमें खिलौने जैसे ऑफर देकर यह अपने उत्पाद की बच्चों को अधिक आकर्षित करते है| तथा बच्चे उसे खरीदने की जिद करने लगते हैं|

बच्चों पर विज्ञापनों का क्या प्रभाव पड़ता है?

बच्चों को विज्ञापन सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही रूपों में प्रभावित करता है|एक तरफ विज्ञापनों में दिखाई जाने वाली अच्छी बातें बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं वहीं दूसरी ओर विज्ञापनों में दिखाई जाने वाली बुरी बातें उनके खानपान, खेल खुद व शारीरिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं | बच्चों पर विज्ञापन का क्या प्रभाव पड़ेगा वह उनके मनोविज्ञान पर निर्भर करता है क्योंकि सभी बच्चे एक समान नहीं होते |

सकारात्मक प्रभाव :-

1.पहले हम बात करते हैं बच्चों पर विज्ञापनों के पर अपना प्रभाव के बारे में | कुछ विज्ञापन ऐसे होते हैं जिनमें शिष्टाचार से संबंधित बातों को दिखाया जाता है | इन विज्ञापनों के जरिए बच्चे अच्छी-अच्छी बातें सीखते हैं |जैसे बड़ों का आदर करना अच्छा व्यवहार करना और सबसे मिल जुल कर रहना समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझना |

2 कुछ विज्ञापनों में बच्चों के शिक्षा से संबंधित जानकारी दी जाती है | जैसे बच्चों को उनकी शिक्षा में सहयोग प्राप्त होता है विज्ञापन के जरिए ही अच्छा प्रदर्शन करते हैं|

3 विज्ञापनों में संतुलित आहार खाने, खेलकूद करने, अपने आसपास स्वच्छता रखने और शारीरिक गतिविधियां करने हेतु प्रेरित किया जाता है | यह देखकर बच्चे भी की ओर आकर्षित होते हैं वैसा करते हैं |

4 विज्ञापनों में अपने उम्र के बच्चों को अच्छा कार्य करते देख बच्चे फिर से प्रेरित होते हैं और अपने जीवन में कुछ अच्छा करने हेतु प्रयास करते हैं|

5 विज्ञापनों के जरिए धूम्रपान क दुष्प्रभाव प्रभाव को बताया जाता है जिसे देखकर बच्चों के मन मे धूम्रपान के प्रति नकारात्मक भाव उत्पन्न होते हैं| जिससे मैं ऐसी चीजों से दूर ही रहते हैं|

नकारात्मक प्रभाव :-

1 अब बात करेंगे बच्चों पर विज्ञापन के द्वारा बच्चों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव के बारे में विज्ञापनों में कई बार हिंसात्मक घटनाएं दिखाई जाती है | जो बच्चों के मन मस्तिष्क पर बुरा असर डालती है|

2 नशीली पदार्थों के विज्ञापन बच्चों को इसकी और आकर्षित करते हैं और बच्चे ऐसी गलत संगत में पड़ सकते हैं|

3.विज्ञापनों में लिंग और रंगभेद को दर्शाया जाता है जिस को बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है|

4.विज्ञापनों के जरिए बच्चों में जिद्दी पन कीआदतें विकसित होती हैं| जो कि एक चिंता का विषय है|

5 आजकल अखबार में किशोरावस्था के दौरान की गई घटनाएं देखने को मिल रही है |और इसमें टीवी पर दिखाए जाने वाले अश्लीलता काफी हद तक जिम्मेदार है|

6 विज्ञापनों में बहुत से ऐसे खाद्य पदार्थ का विज्ञापन दिया जाता है| जो कि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं पर फिर भी बच्चे इन चीजों को लेने के लिए जिद करते हैं|

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