अमेरिका ने 20 साल बाद छोड़ा अफगानिस्तान

*तय समय से 1 दिन पहले सोमवार रात अमेरिकी विमानों ने काबुल एयरपोर्ट से भरी अंतिम उड़ान अमेरिकी राष्ट्रपति वाइडन ने कहा खत्म हो गया हमारा अफगानिस्तान मिशन*

आतंकवाद के खिलाफ दो दशकों की लंबी लड़ाई के बाद अमेरिका अफगानिस्तान से निकल गया है| अफगानिस्तान से निकलने के निर्धारित समय से 1 दिन पहले ही सोमवार की देर रात अमेरिकी विमानों ने काबुल एयरपोर्ट की अंतिम उड़ान भरी | अमेरिकी विमानों के उड़ान भरते ही तालिबान आतंकियों ने हवा में गोलियां चलाकर खुशियां मनाई | हालांकि तालिबान के सामने अब अफगानिस्तान को पटरी पर लाने की मुश्किल चुनौती होगी | अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी ऐसे समय में हुई जब गनी सरकार को अपदस्थ कर तालिबान ने सत्ता पर कब्जा जमा लिया |

काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद अफरातफरी के बीच 2 हफ्ते तक चले निकासी अभियान के दौरान एक लाख से ज्यादा लोगों को अफगानिस्तान से सुरक्षित निकाला गया फिर 100 से ज्यादा अमेरिकी और अमेरिका एवं नाटो देशों का साथ देने वाले हजारों अफगान पीछे छूट गए है | तालिबान के शासन में पश्चिमी देशों के सहयोगी आफ गानों की जान का सबसे ज्यादा खतरा है हालांकि तालिबान ने सभी को माफी देने का ऐलान किया है|

अफगानिस्तान से हर हाल में अमेरिकी सैनिकों की मंगलवार तक निकासी के अपने फैसले पर अड़े रहने का बचाव करते हुए राष्ट्रपति वार्डन ने कहा कि अब हमारा 20 साल का मिशन खत्म हो गया है| उन्होंने भारी खतरे के बीच निकासी अभियान चलाने के लिए अमेरिकी सैनिकों का आभार जताया और कहा कि दुनिया तालिबान को उन लोगों को सुरक्षित मार्ग देने की प्रतिबद्धता पर कायम रखेगी जो अफगानिस्तान से निकलना चाहते हैं | अफगानिस्तान से जल्दी बाजी में सैनिकों को निकालने के फैसले के लिए मैडम को अमेरिका में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है |

अलकायदा के आतंकवादियों मैं 9 सितंबर, 2001 को अमेरिका में विमानों को अगवा कर हमला किया था | दो विमानों को न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जुड़वा इमारतों से टकराया था, पेंटागन की इमारत पर भी एक विमान गिराने की कोशिश की गई थी| अलकायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन को समय तालिबान ने अफगानिस्तान में पनाह दी थी | इससे हमले का बदला लेने के लिए अमेरिका ने अफगानिस्तान पर 7 अक्टूबर,2001 की पहली बार हवाई हमला किया था | उसी साल नवंबर दिसंबर में 1000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान पहुंचे थे |

ढाई हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए

दो दशक तक चली लड़ाई में अमेरिका ने 25000 सैनिक मारे गए है| इस दौरान 240000 अफ़गानों की भी जान गई | अमेरिका को इस लड़ाई में 200000 करोड डॉलर (लगभग 150 लाख करोड़ रुपए )की चपत भी लगी |

america and Afghanistan

गोलियों की तड़तड़ाहत के साथ तालिबान ने मनाया जश्न

अमेरिकी सेना के आखरी विमानों के उड़ान भरते ही तालिबान ने गोलियों की तड़तड़ाहत के साथ जश्न मनाया | आधी रात अमेरिका के सी-17 विमान के रवाना होते ही तालिबान आतंकी हवाई अड्डे पर प्रवेश कर गए और उसको पूरी तरह नियंत्रण मे ले लिया | हवाई अड्डे के अंदर तालिबान नेताओं ने पगड़ी पहनकर मार्च निकाला | तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह ने कहा की यह दिन हमारे लिए ऐतिहासिक है| हमें अपनी पूरी आजदी हासिल करने पर गर्व है | हम पूरी दुनिया से अच्छे सम्बन्ध रखना चाहते है |

तालिबान के सामने एक बड़ी चुनौती

हथियार के बल पर सत्ता पर काबिज होने वाले तालिबान के लिए सरकार चलाना आसान नहीं होगा | बदहाल अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना उसके लिए बड़ी चुनौती है| तालिबान भी यह है अच्छी तरह समझता है | इसलिए उसके शीर्ष नेता हेकमतुल्ला मासिक ने सभी लोगों से काम पर लौटने की अपील की| उसने कहा लोगों को धैर्य रखना चाहिए हम सब कुछ वापस पटरी पर लाएंगे | इसमें कुछ वक्त जरूर लगेगा हालांकि अभी लोगों को तालिबान पर यकीन नहीं हो रहा और देखना चाहते हैं कि आने वाली सरकार का रुख क्या होता है |

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